Friday , 14 December 2018

ABVP के प्रांतीय अधिवेशन में बोले पन्त, युवाओं से बहुत सी उम्मीदें हैं

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हल्द्वानी (नैनीताल) – आज पूरी दुनिया में इस बात पर चिंतन है कि भविष्य का भारत कैसा हो। युवाओं से बहुत सी उम्मीदें हैं। विभिन्न स्तरों पर बेहतरी के बावजूद समाज में बड़े स्तर पर मूल्यों में गिरावट चुनौती है। युवाओं के लिए यह बड़ी चुनौती है कि वे मूल्यों को जिंदा रखते हुए परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए काम करें। इन मूल्यों को अपने प्रोफेशन में लाएं। आज पूरे देश में राष्ट्र और मूल्यों का चिंतन करने वाले संगठनों के खिलाफ साजिश रची जा रही है। वे संविधान और मनु स्मृति में से एक को चुनने की बात करते हैं। युवाओं को जाति और धर्म के नाम पर बांटने की साजिश हो रही है। यह लड़ाई अब कैंपस से निकल गांवों तक पहुंच चुकी है। हमें इस चुनौती लक्ष्मी शिशु मंदिर, हल्द्वानी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद , उत्तरांचल के 18वें प्रांतीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में ये बात कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने कही।

 

उत्तरांचल प्रांत के इस अधिवेशन में प्रदेश के सभी जिलों के सात सौ कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी जुटे हैं। तीन दिन चलने वाले इस अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में एबीवीपी ने मूल्यों पर जोर दिया। कहा हमें मूल्यों को बचाकर आगे बढ़ना है। यदि मूल्य नहीं बचेंगे तो हमारा भी कोई अस्तित्व नहीं होगा।

 

एबीवीपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. डी. के. शाही ने कहा ने कहा कि शिक्षा का भारतीयकरण बेहद जरुरी है। आज यूनिवर्सिटी कैंपस और कॉलेजों में धर्म, जाति के नाम पर जहर घोला जा रहा है। कुछ लोग जाति के नाम पर देश को खंड-खंड करते हुए खुद को स्थापित करना चाहते हैं। वे संविधान और मनु स्मृति में से किसी एक को चुनने की चुनौती दे रहे हैं। लेकिन हमें समझना होगा कि क्या सही है और क्या गलत। संविधान सर्वोपरि है, लेकिन मनु स्मृति को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है। अंग्रेजों ने साजिशन मनु स्मृति का गलत ढंग से अनुवाद किया।

 

प्रदेश अध्यक्ष डॉ.जगत सिंह बिष्ट ने अधिवेशन का प्रस्ताव छात्रों के मध्य रखा। उन्होंने कहा कि आज देश में राष्ट्रीय चिंतन बढ़ रहा है। प्रदर्शनी उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० नागेश्वर राव ने ज्ञान और चरित्र निर्माण पर जोर दिया। राव ने कहा कि ज्ञान एवं चरित्र से ही हम उद्देश्यों का पा सकते हैं। प्रदेश मंत्री सुधीर जोशी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों को एबीवीपी छात्रों तक पहुंचाते हुए राष्ट्र एवं चरित्र निर्माण में जुटी है। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चार पुरुषार्थ हैं। जेएनयू में ज्ञान की उच्चता है, लेकिन वे धर्म में पीछे हैं। धर्म का मतलब केवल पूजा पाठ नहीं है।

 

स्वागत समिति के अध्यक्ष साकेत अग्रवाल ने संगठन के भारतीय मूल्यों और चरित्र निर्माण को युवाओं तक ले जाने पर जोर दिया। अतिथियों द्वारा विभिन्न जिलों के द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया।

 

एबीवीपी के प्रदेश अधिवेशन में चार धाम, प्रदेश की विभूतियों के चित्र, गढ़वाल, कुमाऊँ , संस्कृति, सभ्यता के दर्शन हुए। कार्यक्रम में क्षेत्रीय संगठन मंत्री मनोज़ निखरा, प्रान्त संगठन मंत्री प्रदीप शेखावत, नगर अध्यक्ष इंदरजीत सिंह, कार्यक्रम अध्यक्ष आवासीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० एच० एम० धामी ,सुरेश गढ़िया, , रमाकांत श्रीवास्तव, प्रवीन बिष्ट, अरुण बहुगुणा,प्रदेश सह मंत्री अनुज जोशी, पूर्व जिला संयोजक अंकित तिवारी , गढ़वाल संभाग छात्रा प्रमुख संगीता , जिला संयोजक विनोद चौहान,पूर्व सहसचिव आकाश थापा, जिला छात्रा प्रमुख अंजली शर्मा, कंचन शर्मा, पूर्व विश्वविद्यालय प्रतिनिधि नितेश, दीपक कृषाली, विनय पटवाल,विकास सिंह, नीलम,निशांत शर्मा,अमित पंवार, संदीप शर्मा सहित एबीवीपी के कार्यकर्ता एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

 

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