Thursday , 15 November 2018

सरकार के इस नये प्लान से रुकेगा पलायन, कैबिनेट ने भी दी मंजूरी

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देहरादून- सबकुछ ठीक-ठाक रहा और सरकारी नीति का सलीके से अमल हुआ तो तय है कि उत्तराखंडी नौजवान आने वाले वक्त में नौकरी करने वाले नहीं नौकरी देने वाले बन पाएंगे। सूबे से पलायन को रोकने और राज्य के नौजवानों में कारोबारी बनने की हिम्मत में इजाफा हो इसके लिए सूबे की सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ‘स्टार्टअप’ के जरिये स्वरोजगार, रोजगार और नौकरी करने के बजाए नौकरी देने का भाव पैदा करने के लिए ये कदम उठाया है।
तय है कि इस योजना से उन हजारों युवाओँ का सपना साकार हो पाएगा जिनके पास आइडिया और  हौंसला और मुकाम तक पहुंचने की कूवत तो है लेकिन पूंजी और हौसलाअाफजाई का कोई सहारा नहीं है।
दरअसल राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को स्टार्टअप नीति-2018 को हरी झंडी दिखा दी है। इसके तहत कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, जैविक प्रौद्योगिकी, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण व आयुष के क्षेत्रों में 500 नए स्टार्ट अप विकसित किए जाएंगे। नए उद्यमियों को आगे बढ़ाने को उनके प्रशिक्षण, उत्पादों की मार्केटिंग से लेकर पेटेंट तक सरकार भरपूर मदद करेगी। उन्हें जीएसटी से राहत रहेगी।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी होने की वजह से इन फैसलों की नियमित ब्रीफिंग नहीं की गई। सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल ने नई स्टार्ट अप नीति के तहत युवाओं को नए स्टार्ट अप के विकास पर मुहर लगाई।
नए स्टार्टअप के बारे में स्टार्टअप काउंसिल फैसला लेगी। इसके तहत प्रशिक्षण के लिए चयनित सामान्य युवाओं को प्रशिक्षण के लिए प्रतिमाह 10 हजार रुपये दिए जाएंगे। अनुसूचित जाति व जनजाति और दिव्यांग के युवाओं को 15 हजार रुपये दिए जाएंगे। स्टार्ट अप नीति में उत्पादों की मार्केटिंग के लिए भी सरकार मदद देगी।
इसी तरह उत्पादों की मार्केटिंग के लिए युवाओं को पांच लाख और अनुसूचित जाति-जनजाति के युवाओं को सात लाख रुपये तक वित्तीय सहायता मिलेगी। नए उद्यमियों को पेटेंट के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। एक लाख और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट के लिए पांच लाख रुपये दिए जाएंगे। खास बात ये भी इन उद्यमियों को जीएसटी से भी राहत रहेगी।

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