Tuesday , 25 September 2018

PM नरेंद्र मोदी छात्रों से रूबरू होते हुए बोले, कभी भी दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा मत कीजिए खुद के साथ अनुस्पर्धा कीजिए

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को स्कूली बच्चों को परीक्षा के तनाव से बचने के टिप्स दिए। परीक्षा पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छात्रों के सवाल पूछने से पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए छात्रों को संबोधित करते हुए कई बातें कही।

पीएम मोदी ने कहा कि 150 करोड़ छात्रों से रूबरू होने का मौका मिल रहा है। ये प्रधानमंत्री का कार्यक्रम नहीं करोड़ों बच्चों का कार्यक्रम है। पीएम ने कहा कि अगर विश्वास नहीं है तो कितनी भी मेहनत करेंगे सफल नहीं हो पाएंगे।

बच्चों द्वारा आत्मविश्वास की कमी के सवाल पर पीएम ने कहा- यदि आपके अंदर आत्मविश्वास नहीं है तो सब याद होते हुए भी आपको वह शब्द याद नहीं आता है जो आपने पढ़ा होता है। अपना उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मैं बचपन में विवेकानंद को पढ़ता था वे कहा करते थे कि मैं ही ब्रह्म हूं। वो कहा करते थे कि 33 करोड़ देवी देवताओं की पूजा करो लेकिन अगर तुम्हारे अंदर आत्मविश्वास नहीं होगा तो वे 33 करोड़ देवी-देवता कुछ नहीं कर पाएंगे। मेरे कहना का मतलब है कि आत्मविश्वास अपने प्रयासों से आता है। आत्मविश्वास कोई जड़ी-बूटी नहीं है कि मम्मी कह के दें कि एग्जाम में जाने से पहले ये टैबलेट खा लेना।

पीएम ने कहा- स्कूल जाते समय यह बात दिमाग से निकाल दीजिए कि कोई आपका एग्जाम ले रहा है, कोई आपको अंक दे रहा है। इस बात को दिमाग में रखिए कि आप खुद का एग्जाम ले रहे हैं। इस भाव के साथ बैठिये की आप ही अपना भविष्य तय करेंगे

एकाग्रता के सवाल पर पीएम ने कहा- एकाग्रता के लिए किसी एक्टिविटी की जरूरत नहीं है। आप खुद को जांचिए परखिए। बहुत लोग कहते हैं कि मुझे याद नहीं रहता है लेकिन यदि आपको कोई बुरा कहता है तो दस साल बाद भी आपको वह बातें याद रहती है। इसका मतलब है कि आपकी स्मरण शक्ति में कोई कमी नहीं है। जिन चीजों में सिर्फ बुद्धि नहीं आपका मन भी जुड़ जाता है वह जिंदगी का हिस्सा बन जाता है।

पीएम ने बच्चों से कहा- आप खुद के साथ स्पर्धा कीजिए कि मैं जहां कल था उससे दो कदम आगे बढ़ा क्या, अगर आपको ऐसा लगता है तो यही आपकी विजय है, कभी भी दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा मत कीजिए खुद के साथ अनुस्पर्धा कीजिए

पहले हमें खुद को जानना चाहिए। जब आप प्रतिस्पर्धा में उतरते हैं तो तनाव महसूस होता है। आप खुद के लिए काम कीजिए। खुद को जाने और फिर जिस चीज में सक्षम हैं उसी विषय में आगे बढ़ें। किसी और को देखकर स्पर्धा में उतरते हैं तो आप निराश हो जाते हैं।

इस बात को ध्यान में रखिए कि हर माता-पिता अपने बच्चों के अच्छे के लिए त्याग करते हैं। अपने बच्चों को सोशल स्टेटस मत बनाइए। बच्चे की केयर करें उस पर दबाव ना डाले। एक एग्जाम जिंदगी नहीं होती है।

एक खुला और तंदरुस्त वातावरण बच्चों को दिया जाना चाहिए। केवल एग्जाम में नहीं बल्कि हमेशा। मैं अभिभावकों से कहना चाहूंगा दूसरे बच्चो से अपने बच्चो की तुलना न करें, आपके बच्चे के अंदर जो सामर्थ्य है उसी की बात कीजिये, अंक और परीक्षा जीवन का आधार नहीं हैं।

ध्यान लगाने के सवाल पर पीएम ने कहा कि यदि आपको फोकस करना है तो पहले डीफोकस करना सीखें। मनुष्य के शरीर की रचना ऐसी है कि जब भी वह पंचमहाभूत के संपर्क में आता है वह रिफ्रेश हो जाता है।

अगर आपको खेलने का, गीत गाने का शौक है करिए। दोस्त से मिलने का मन है मिलिए। डी-फोकस किए बिना आप फोकस नहीं कर सकते हैं। जो आपको अच्छा लगता है करिए, खुद को उन चीजों से अलग मत करिए। पीएम ने बच्चों को आसान शब्दों में आईक्यू और ईक्यू में फर्क समझाया।

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