Thursday , 15 November 2018

उत्तराखंड में कहां गिरती है कितनी बर्फ, अब जानकारी मिलेगी फटाफट

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उत्तराखंड में पहली बार उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी के आंकड़े भी दर्ज किए जाएंगे। केंद्रीय जल आयोग (cwc) इसके लिए उत्तराखंड में 5 स्थानों पर स्नो गेज स्टेशन स्थापित करने जा रहा है। हरेक स्टेशन मानवरहित होगा और इससे मिलने वाले डाटा सेटेलाइट के जरिए सीधा डाटा सेंटर तक पहुंचाए जाएंगे।

केन्द्रीय जल आयोग अभी तक उत्तराखंड में गंगा और यमुना और उसकी सहायक नदियों के जल स्तर के आंकड़े जुटाता रहा है। राज्य में होने वाली बारिश के आंकड़े भी उसके पास उपलब्ध रहते हैं। इसके लिए उसके उत्तरकाशी, देवप्रयाग, हरिद्वार, ऋषिकेश, मरोड़ा (नयार), कोटेश्वर (टिहरी) में ऑटोमेटिक टेलीमेट्री स्टेशन बने हुए हैं। ये आंकड़े शोध छात्र, सरकारी, गैर सरकारी एजेंसियों व वैज्ञानिक विषलेषण के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन पहली बार शोध कार्यों के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली बर्फबारी के आंकड़े भी मिलने लगेंगे। इसमे बर्फ पड़ने और पिघलने की रफ्तार के सही आंकड़े मिलने लगेंगे।

स्नो गेज स्टेशन बनाने के प्रस्ताव को केन्द्र ने हरी झंडी दे दी है। हरेक स्टेशन पर करीब 23 लाख रूपये का खर्च आने का अनुमान है। उत्तराखंड के अलावा इससे पहले cwc द्वारा हिमाचल प्रदेश के शिमला मंडल में बर्फबारी के आंकड़े लेने के लिए ऐसे उपकरण लगाए गए हैं। केन्द्रीय जल आयोग हिमालय गंगा मंडल के ईई आशीष कुमार सिंघल ने बताया कि बर्फबारी के आंकड़े बारिश के जितने ही उपयोगी हैं। अभी तक सेटेलाइट के जरिए मौसम का फॉरकास्ट उपलब्ध है, बारिश कितनी पड़ी उसे भी नाप लिया जाता है लेकिन बर्फ कितनी पड़ रही है। साल दर साल उसमें क्या बदलाव आ रहे हैं। उसके बारे में हमारे पास कोई सटीक आंकड़े नहीं हैं।

कैसे लेंगे आंकड़े

स्नो गेज स्टेशन में स्नो के आंकड़े जुटाने वाला उपकरण, डाटा कम्यूनिकेट करने वाली संचार प्रणाली, सेटेलाइट से लिंक करने के लिए ट्रांसमिटर लगा होगा। स्टेशन ऑटोमेटिक ऑपरेट होगा और केन्द्रीय संस्थान के अधिकारी समय-समय पर इसकी देखरेख के लिए स्पॉट पर जाएंगे।

वैज्ञानिक दावों को मिलेगा मजबूत आधार 

देश के बड़े भूभाग के लिए सदानीरा गंगा व यमुना नदी में उपलब्ध पानी उच्च हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली बर्फबारी पर निर्भर है। वैज्ञानिक पहले ही स्नो लाइन के ऊपर की ओर खिसकने की चेतावनी दे चुके हैं। ऐसे में जब बर्फबारी जब आंकड़ों में दर्ज होनी शुरू हो जाएगी तो इससे उनके दावे को स्पष्ट आधार भी मिलेगा। उनकी शोध रिपोर्ट अधिक विश्वसनीय मानी जाएंगी।

 

यहां स्थापित होंगे स्टेशन-  माणा (चमोली)-4268 मीटर, केदारनाथ (रुद्रप्रयाग)-5358 मीटर, गौमुख (उत्तरकाशी)-4000 मीटर, खाती (बागेश्वर)-2100 मीटर, गंगी (टिहरी)-3563 मीटर

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