Tuesday , 19 June 2018

यहां बहने वाली नदी धर लेती है इंसान का रूप

Home / 18+ / यहां बहने वाली नदी धर लेती है इंसान का रूप
saraswati-river_1478514416

महाभारत काल की कई घटनाओं से जुड़ा होने के कारण भारत के इस गांव को सबसे पुराना गांव माना जाता है। यहां बहने वाली पावन सरस्वती नदी इंसान का रूप धर लेती है। माणा गांव से थोड़ी दूर पर सरस्वती नदी है। यहां नदी तेज वेग के साथ बहती है। लेकिन पानी कम होने के बाद यहां अद्भुत नजारा दिखाई देता है। यहां पानी कम होने पर नदी में इंसान का चेहरा दिखाई देता है। जो अपने आप में अद्भुत दृश्य लगता है। इस नदी पर पत्थर से बना पुल है। इसे भीमपुल कहते हैं। इसके बारे में कहा जाता है कि जब पांडव स्वर्गारोहिणी के लिये आगे बढ़ रहे थे तो द्रौपदी सरस्वती नदी को पार नहीं कर पायी। पांडवों ने इसके बाद सरस्वती से रास्ता देने का आग्रह किया लेकिन सरस्वती नहीं मानी। पांडवों में सबसे बलशाली भीम ने तब दो बड़े पत्थर लुढकाकर पुल बना दिया। भीम ने तब अपनी गदा जोर से सरस्वती नदी पर मारी थी जिससे यह विलुप्त हो गयी। यह नदी थोड़ा आगे बढ़कर अलकनंदा में मिलती है लेकिन ऐसा आभास होता है जैसे कि यह विलुप्त हो रही हो। इसके विलुप्त होने के पीछे एक और कहानी भी है। गणेश जब महाभारत लिख रहे थे तो सरस्वती बड़ा शोर करते हुए बह रही थी। गणेश ने उससे शोर कम करने को कहा लेकिन सरस्वती नहीं मानी। इससे क्रोधित होकर गणेश ने सरस्वती को विलुप्त होने का श्राप दे दिया था। इस तरह से यह नदी अपने उदगम से कुछ मीटर बहने के बाद ही विलुप्त हो जाती है लेकिन आज भी भीमपुल के पास वह पूरी गर्जना के साथ बहती है। कहा जाता है कि यह नदी आगे जाकर प्रयाग में गंगा और यमुना से मिलती है लेकिन वहां पर भी यह दिखती नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *